लखनऊ अपराध अपराधियों के घेरे में भाग 3

आर डी शुक्ला द्वारा  दोस्तों सन 70 के बाद लखनऊ में अपराधियों के दो प्रमुख गुट बन गए पहला जिसने चारबाग संभाला जहां से नंबर 2 का सामान आता था ट्रांसपोर्ट का बिजनेस था वहां पर बख्शी भंडारी नाम के लोग हैं वहां की दबंगई का ठेका लिया इन लोगों का विरोधी था रू दर जो मामूली साइकिल पर क्षेत्र में दबंगई करता था लेकिन कलेजे का इतना मजबूत था कि वह इन मजबूत धंधे वालों से बक्शी हो या भंडारी मुकाबला करता रहता था और रोज उनसे वसूली ले जाता इसी प्रकार ठीक डालीगंज क्षेत्र में अनाज की मंडी में रामगोपाल की वसूली चलती है उनका साथ देने वाला था प्रेम शंकर शुक्ला रामगोपाल ने सीतापुर तक अपना वर्चस्व बना रखा था बुद्धू पहलवान थे रामगोपाल ने उनको एक लड़के से ही मरवा दिया था इसलिए रामगोपाल का नाम मुखिया के रूप में उभरने लगा और उनका साथ देने में प्रेम शंकर शुक्ला लगे रहे क्योंकि यहां अनाज की मंडी थी इसलिए ठीक ठाक वसूली हो जाती है ठीक इसी प्रकार चारबाग क्षेत्र में बक्शी भंडारी अपने व्यवसाय के साथ दबंगई क्या करते थे इन लोगों का विरोधी रुद्र था वह रोज बख्शी भंडारी से वसूली करता रहता था निडर और अपने गिरोह को बना रहा था ठीक इसी प्रकार एक गिरोह ग्रामीणों का अमौसी के रामचंद्र यादव बना रहे थे बड़ी बड़ी मूछें पहलवान थे कहा जाता था कि वह अमौसी में रहते थे और अपने दुश्मनों को उधर से आने वाली ट्रेन रोककर उसके बायलर में डालकर उसे खत्म कर देते थे जला देते थे बहुत खौफ था उनका उनके साथ चलते थे शिव कुमार यादव शंकर यादव रूप यादव सुंदर यादव यह सब देहाती क्षेत्र के खलीफा थे शहर में उनका आवागमन बहुत कम होता था यह चारबाग पर कब्जा करना चाहते थे इसीलिए धीरे-धीरे पक्षी भंडारी ग्रुप से इनकी रंजिश चलने लगी मक्सी भंडारी ग्रुप में के पी सिंह दरोगा सिंह और सभी हटे कट्टे लोग एक ग्रुप बनाए हुए थे अल्मोड़ा मौसी के रामचंद्र का ग्रुप बी पहलवान टाइप का ग्रुप था लेकिन वह बुद्धि से बैल थे यह शहर के दबंग बक्शी भंडारी ग्रुप बुद्धि से चलते से ठीक इसी प्रकार निगोहा और उस क्षेत्र के शिव कुमार दीक्षित का बहुत नाम था उनका गिरोह केकेसी कॉलेज से संबंधित था दूसरी तरफ जियामऊ सुखदेव एक नामी-गिरामी दबंग थे इनकी उधर अर्जुनगंज गोसाईगंज और बालामऊ आज के गोमती नगर विस्तार क्षेत्र में खूब जलवा था तीसरी हो डालीगंज में एकमात्र रामगोपाल थे यह जो चाहते थे जैसे चाहते हैं गल्ला व्यापारियों से उगाही करते थे अरुणा शंकर अन्ना के भाई प्रेम शंकर शुक्ला इनका काम किया करते थे चौक क्षेत्र में देवी खलीफा थे उसके बाद शब्बीर सदनलाल भोपाल सरीना आदि नए नवेले लोग पैदा हुए जिन्होंने वहां दबंगई शुरू की और यह लोग नवाब लोगों की एंट्रिक्स यानी पुरानी कीमती चीजों का सौदा करके पैसा कमाते थे फिर आपस में रंजीत से भी हुई यह प्रमुख ग्रुप थे शहर के जो शुरू में सिर्फ अपने अपने क्षेत्रों में वसूली करते थे इन्होंने साल 2 साल आपस में कोई टकराव नहीं किया और किसी तरह का आपस में किसी प्रकार की कोई रंजिश भी नहीं थी ऑप्शन 72 73 के बाद इन लोगों में आपस में जम के बरस की लड़ाई शुरू हुई जिसकी कहानी हम आगे सुनाएंगे जारी रहेगी लखनऊ के दबंगों की जंग पढ़ते रहिए गा सच्ची कहानियां लखनऊ के अपराधियों की


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