करो ना कॉल का लॉकडाउन तो हमारे लिए वरदान साबित हो गया

आरडी शुक्ला की कलम से


22 मार्च 1920 के दिन अचानक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन आया रेडियो पर दुनिया में तेजी से फैल गई करो ना बीमारी को देखते हुए देश में 1 दिन का जनता कर्फ्यू लगाया जाएगा

फिर क्या था पूरे लखनऊ में अफरा-तफरी मच गई लोग इस ताजा महामारी से अवगत हुए ट्रेनें बंद कर दी गई जहाज बंद हो गए जो जहां था वहां फंस गया हालत यह हो गई लोग डर के मारे जनता कर्फ्यू वाले दिन घरों में दुबक गए उसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिर रेडियो पर संबोधन किया और लॉक डाउन की घोषणा की पूरा देश में पूरी दुनिया स्तब्ध थी कुदरत की इस खतरनाक बीमारी से जनता भयभीत हो गई और घरों में दुबक कर रहने के लिए मजबूर हो गई धीरे-धीरे स्कूल कॉलेज बंद हो गए सड़कें वीरान हो गई आवागमन पूरी तरह ठप हो गया देश जहां पर था वहां ठहर गया सारे कामकाज बंद हो गए बाजार बंद हो गए सिनेमा माल बंद हो गए ऑफिस दफ्तर बंद हो गए फिर क्या करते हैं हमारे जैसे आदमी घर मे नजर बंद हो गए सड़कों पर पुलिस ने मोर्चा संभाल लिया ऐसी हालत में वृद्ध उम्र में जिसमें कहा गया कि 65 साल से ऊपर का कोई व्यक्ति घर से बाहर ना निकले तो घर में ही बैठना आवश्यक हो गया भाग्य बस कुछ दिन पहले ही हमारे ब्लॉक में जिओ फाइबर लाइन खींची थी तो अपने पत्रकार मित्रों के कहने पर मैंने जबरन कनेक्शन ले लिया था ना मैं फोन चलाता था ना टीवी लेकिन मित्रों की बात थी लगवा लिया वह बेकार पड़ा था तभी जिओ वालों ने टीवी का सेटअप बॉक्स बांटना शुरू किया वह भी फ्री में हमारे पास भी आ गया लेकिन मैं टीवी नहीं देखता था और ना ही मेरे पास टीवी ही था क्योंकि मैं 2000 से 2010 तक 5 स्टार न्यूज़ ए फैशन का लखनऊ में प्रसारण करता था यह न्यूज़ लखनऊ के केबल वालों के माध्यम से सीडी से चलाई जाती थी 1 घंटा रोज उस समय चैनल इतने नहीं प्रसारित होते थे मैं जॉपलिंग रोड पर अपना स्टूडियो बनाकर दिन रात काम करता था अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी दिल्ली से लाया था तो रोज लगभग 1 घंटे की न्यूज़ टीवी के लिए बनाया करता था लगभग 14 15 घंटे स्टूडियो में रहता था धीरे-धीरे मेरे आंख में जवाब दे दिया था न्यू स्केटिंग कराते कराते मेरे आंख में हेमरेज हो गया उसके बाद से मैंने डॉक्टर के कहने पर टीवी देखना बंद कर दिया अब बात करता हूं 22 मार्च को मुझको अपनी भतीजी उपमा मैं अपना एक टीवी दे दिया मुझ को फिर से टीवी देखने का शौक पैदा हो गया यह इत्तेफाक की बात है कि 22 मार्च को ही रिजवान नामक हमारा शिष्य आया मैंने उससे कहा कि यह सेट टॉप बॉक्स काफी दिनों से रखा है इस टीवी को पेट करवाओ जिओ के सेटअप बॉक्स का ट्रायल ले हमको लॉक डाउन का कुछ नहीं मालूम था यह काम मेंऐसे ही करवा रहा था दिन में टीवी चालू हुआ शाम को मोदी जी का संबोधन आया कई वर्षों के बाद मैंने टीवी देखा वह भी पहली खबर मोदी जी के संबोधन की और करो ना महामारी को लेकर जनता कर्फ्यू की घर में भाग्य वश टीवी चालू हो गया था और दूसरी तरफ महामारी और लॉक डाउन की प्रक्रिया तेजी से शुरू हो गई 24 मार्च से तो सब बंद हो गया यहां तक कि जो घर में टिफिन आता था खाने का वह भी बंद हो गया फिर किसी तरह उपमा जी ने अपने चपरासी के घर से खाना बनवा कर हमारे यहां भेजना शुरू किया तब मेरा काम चला खैर हालत बिगड़ते गए प्रदेश देश दुनिया घरों में बंद हो गई मैं क्या करता सोच ही रहा था कि अब समय कैसे काटा जाए अचानक दिल्ली सरकार की घोषणाएं हुई की दूरदर्शन के राष्ट्रीय चैनल पर रामायण और कृष्ण जी से संबंधित धारावाहिक तत्काल शुरू कर दिया गया आपको यह जानकर आश्चर्य होगा और हंसी भी आएगी कि मैं वकील हूं एलएलबी किया एमकॉम इन बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन किया लखनऊ विश्वविद्यालय से 1976 77 में और नौकरी करने अखबार में चला गया स्वतंत्र भारत में नौकरी से पहले का जीवन पढ़ाई लिखाई घुमई मौज मस्ती में कटी छात्र थे लेकिन कभी भी राम और कृष्ण की जीवनी ना विश्वविद्यालय में पढ़ाई गई नए स्कूल कॉलेज में अंग्रेजी स्कूलों में पढ़ा था वहां तो बिल्कुल इसका कोई मतलब ही नहीं था 1 मिनट में प्रेयर हो जाती थी पता नहीं क्यों उन दिनों की सरकारों में भी धर्म से और वह भी खासकर हिंदू धर्म के बारे में कहीं कुछ ना पढ़ाया ना समझाया पिताजी हमारे स्वर्गवासी हो चुके थे वह भी मां वैष्णो देवी के दरबार में ही प्राण त्याग चुके थे बस इतना ही धर्म हम लोगों को मालूम था बहुत छोटे में पिताजी का देहांत हो गया था वह देवी के भक्त थे उनके देहांत के बाद धर्म से हमारा कोई संबंध ही नहीं रह गया क्या थे राम क्या थे कृष्ण क्या थी उनकी लीलाएं क्यों उन्होंने अवतार लेकर राक्षसों का वध किया हमको मालूम ही नहीं था यूं कहिए कि हमें धर्म की एबीसीडी नहीं मालूम थी आपको आश्चर्य होगा कीसन 1984 में महानगर में अचानक क्रोध में शिव मंदिर का निर्माण करा दिया महानगर वासी वकील पुलिस और जनता ने इतना सहयोग दिया कि वह मंदिर विशाल मंदिर बन गया जिसको आज नीलकंठेश्वर मंदिर संत मार्केटकहते हैं मुझे शिवजी की आरती भी नहीं आती थी और रातों-रात मंदिर का निर्माण हो गया भोलेनाथ का शिवलिंग रख दिया गया रात को ही एक त्रिशूल लगा दिया गया और आगे चलकर वह वकीलों और पुलिस और जनता की मदद से बनकर तैयार हो गया इस बीच में क्षेत्र में उस मंदिर के झगड़े की खबरें फैलती रहे लोग आते नहीं थे डर के मारे कि मंदिर झगड़े का है तब हमने वह प्रयास शुरू किए जिससे इस मंदिर में लोग आएं भंडारा करना रामायण करना तीज त्यौहार पर रोशनी करना लोगों को प्रसाद खिलाना साधुओं को बुलाना लेकिन मैं स्वयं पूजा में कभी नहीं बैठा था मुझे कुछ आता ही नहीं था पशुधन भारत में क्राइम रिपोर्टिंग कर रहा था बदमाश पुलिस वालों की गालियां सुनता था पिता के देहांत के बाद घर में भी धर्म का कुछ ऐसा कार्य नहीं हुआ जिससे कि ठीक से जानकारी मिलती है ना ही सरकार का कोई ऐसा प्रयास था जो मैंने महसूस किया आज 70 साल में जैसा कि आज सरकार कर रही है मैंने रामायण का एक पन्ना भी नहीं पढ़ा था राम मर्यादा पुरुषोत्तम क्यों कहे जाते हैं इसका कोई ज्ञान नहीं था हां रामलीला देखते थे उसमें भी खुराफात में लगे रहते थे इसलिए पूरी बात समझ में नहीं आती थी वह बचपना था इसी तरह जन्माष्टमी के त्यौहार के दिन घर मैं भी कृष्ण जन्म की जन्माष्टमी सजाते थे और पुलिस लाइन पीएससी में उनकी पूरी झांकी देखने जाते थे लेकिन पता नहीं क्या मकसद होता था कि कुछ समझ में इसलिए नहीं आता था कि लड़क पाने में भगवान के बारे में सोचते ही नहीं थे या यूं कहिए माहौल ही ऐसा था इतना गलत काम उस समय होता भी नहीं था सभी लोग सच्चे और ईमानदार हुआ करते थे कोई बेईमानी और गलत काम क करता ही नहीं था इतनी जनसंख्या थी नहीं सभी को नौकरी मिलती थी सब मजे में थे इतनी महंगाई नहीं थी लोग मजे से खा पी लेते थे ज्यादा कि लोगों को लालच नहीं थी गाड़ी घोड़ी की जरूरत नहीं साइकिल से काम चलता था एक्का तांगा रिक्शा सवारी थी इसी तरह 
युवा जीवन बिता अखबार में नौकरी करने लगे वहां की नौकरी खबरों की नौकरी थी 24 घंटे मारामारी की खबरें खोजा करता था सुबह पहली चाय पोस्टमार्टम स्थल पर पीता था श्यामलाल मुख्य जमादार था पोस्टमार्टम का उसके साथ बैठकर लाशें गिनता था कौन सी हत्या की है कौन सी आत्महत्या की है हर मरने वाला एक कहानी छोड़ जाता है बस उसी को मेडिकल कॉलेज में मुर्दा घर से निकलते थे हम लोग वही चाय पीकर आपातकालीन सेवा में होते हुए प्रेस चले आते थे फिर दिन भर की वारदातों को देखते थे पूरे 24 घंटे यही था अब इस बीच रामकृष्ण का किस्सा तक नहीं होता था न जवानी में ना बचपन में और यहां तक लॉकडाउन से पहले तक धार्मिक विचारों में नहीं पढ़ा था अब जब अचानक लाकड़ौन घोषित किया गया और घर के कमरे में कैद हो गया तो एक साधन बचा जीवन का हुआ था टीवी और टीवी पर शुरू हो गए धार्मिक पुराने धारावाहिक जिस समय पहले रामायण धारावाहिक आई थी 80 के दशक में जब उसको देखने के लिए रविवार को सन्नाटा हो जाया करता था ब्लैक एंड व्हाइट टीवी पर घरों घरों में जबरदस्त भीड़ लगती थी उस समय मैं क्राइम रिपोर्टर की अपनी ड्यूटी में इस तरह व्यस्त था कि कभी भी इस धारावाहिक का एक अंक भी नहीं देख पाया था अचानक लॉकडाउन के बाद शुरू हुए रामायण धारावाहिक की पहली कड़ी से जो हमने देखना शुरू किया तो आप यकीन नहीं मानेंगे कि जिस धर्म की एबीसीडी नहीं जानता था रामकृष्ण का जीवन नहीं जानता था जाना शुरू कर दिया रामायण तो नहीं पड़ी लेकिन रामानंद सागर का धारावाहिक और उसका चित्रांकन मन को बहुत अच्छा लगने लगा पहले की तरह भाग सकते थे नहीं हर घड़ी हर संवाद को अच्छी तरह समझ ना और जानना शुरू कर दिया आप सोचें अचानक नेट फाइबर का लगवाना टीवी चालू करना और मोदी जी का लॉकडाउन शुरू करना यह सब अचानक अब बिल्कुल ईश्वर की कृपा से हुआ शायद आप यकीन नहीं करेंगे मैंने पूरी रामायण बिना नागा लगातार देखी उसके बाद कृष्णा देखना शुरू किया उसी बीच राम मंदिर का फैसला भी हो गया था अयोध्या में योगी जी ने दीपोत्सव शुरू करा दिया था रामायण धारावाहिक से यह बात समझ में आई श्री राम को मर्यादा पुरुषोत्तम क्यों कहते हैं उनके आचरण को उनके संवाद को बहुत अच्छे ढंग से समझतेगए अब घर में कैद थे सभी अपना अपना किसी न किसी तरीके से दिल बहला रहे थे कृष्ण के बारे में पूरा समझा कुल मिलाकर 2020 में मैंने पूरी तरह अपने को धार्मिक बनाया धर्म को जाना उसकी बारीकियां समझी अयोध्या का महत्व समझा राम के पूरे आचरण का चित्रांकन देखा ठीक उसी के बाद राम मंदिर का भूमि पूजन हुआ माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और योगी जी ने भूमि पूजन कराया भव्य तब तक मैं सारी चीजें समझ चुका था उसके बाद अयोध्या की रामलीला सीधे देखी तमाम धार्मिक धारावाहिक देखें योगी जी द्वारा आयोजित किया गया दीपावली का दीपोत्सव इतना आकर्षक था कि उसने मन के भीतर ऐसा घर जमा लिया अब धर्म की सही व्याख्या जानने के बाद जीवन में और कुछ अच्छा ही नहीं लगता है महाभारत का अर्थ ही नहीं जानता था मैं क्यों हुआ किस लिए हुआ कृष्णा धारावाहिक में संपूर्ण विस्तार से देख लिया समझ लिया पूरा 1 वर्ष इन धारावाहिकों को देखते-देखते बीत गया प्रदेश में योगी जी ने जिस धर्मराज की स्थापना की है वह अवर्णनीय है जिस प्रकार योगी जी ने राजसत्ता पर धर्म सत्ता को बैठाला वह अब समझ में आ रहा है राक्षसों का वध करके राम और कृष्ण ने धर्म की स्थापना की वह अब समझ में आया कि हमारा हिंदू धर्म कितना विशाल है उसकी जड़ें कितने 100 साल पहले की है यह सब पिछले 70 सालों में किसी सरकार ने समझाने की कोशिश नहीं की नहीं हिंदुओं को अपने धर्म के जानने का मौका मिला पहले जवाहरलाल नेहरू थे फिर इंदिरा गांधी हुई फिर जनता पार्टी बनी यानी कांग्रेस कांग्रेस समझ में आती रही इन लोगों ने हिंदू धर्म को कस के दबा या यह तो कहिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने राम मंदिर आंदोलन खड़ा करके और भारतीय जनता पार्टी बनाकर हिंदुओं और उनके धर्म का कल्याण कर दिया हिंदुओं ने भी भारतीय जनता पार्टी को स्वीकार कर लिया वह भी राम जन्म मंदिर के आंदोलन के चलते ना मुलायम सिंह ने हिंदुओं के सीने पर गोली चलवाई होती और ना ही हिंदू जागता उसी का परिणाम था की दूरदर्शन ने हिंदुओं के रामायण कृष्ण सहित तमाम ऐसे धारावाहिक ऐसे समय में दिखाएं जब लोग अपने घरों में बैठे हुए थे गए थे दुनिया में महामारी की मुसीबत थी तो हमको लगता है कि जब हम जैसे लोगों ने इस लॉक डाउन में अवसर का फायदा उठाते हुए सरकार की मदद से अपना पूरा धर्म टीवी के जरिए समझ लिया तो करोड़ों करोड़ों लोगों ने इसका फायदा उठाया होगा या तमाम लोगों को लॉकडाउन के समय में समय काटने के लिए इन धारावाहिकों को देखना पड़ा होगा निश्चित तौर पर लॉक डाउन के बाद से और धारावाहिकों के राष्ट्रीय चैनल पर लगातार चलने से मैं ही नहीं पूरे देश की दिशा और दशा दोनों बदल गई आज लगभग सभी करो न महामारी से पीड़ित इस अदृश्य बीमारी से बचने के लिए भगवान ही सबसे बड़े सहारा सिद्ध हुए उनको हम राम का है या कृष्ण इनके अवतारों का भी विवरण विस्तार से देखने को मिला अब आप सोचें 70 साल की सरकारों ने ना राम को समझने दिया जनता को ना कृष्ण को और ना अपने धर्म को जो भी समझाया गया उसमें ऐसी गड़बड़ी की गई कि आज हमारे जैसे लोग जिसको बुद्धिजीवी कहते हैं पत्रकार हैं वकील है सभासद रहे हैं और अपना धर्म नहीं मालूम था वह तो अनजाने में मंदिर बना दिया आरती नहीं आती यही सब हम लोगों को न जानने देने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से दूरी बनवा कर रखा गया उनसे डराया गया वामपंथी विचारधारा और कांग्रेसी विचारधारा को हम लोगों के माथे में जबरन पढ़ाया और समझाया गया कुल मिलाकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से दूर रखा गया बस आज इसी कारण बस हम लोग धर्म से बहुत दूर हो गए थे विश्वविद्यालय में तो स्कूल में तो कार्यालय में तो बस वही विचारधाराएं चल रही थी वही हम लोगों के दिमाग में भूसा जा रहा था वह तो अच्छी बात यह हुई राम जन्मभूमि मंदिर आंदोलन शुरू हो गया वह भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने अन्य शाखाओं के माध्यम से जिसमें बजरंग दल विश्व हिंदू परिषद और राजनीतिक दल के रूप में भारतीय जनता पार्टी बनाया इन सब ने मिलकर राम मंदिर आंदोलन 1990 में खड़ा किया बस उसी के बाद से हिंदुओं में नई चेतना आई वह संगठित होने लगा अन्य पार्टियों से वह तंग आ चुका था देश का बहुसंख्यक जाति धर्म में बांटा गया लेकिन अयोध्या मुद्दे पर हिंदुओं की सभी जातियों ने एकता का ऐसा प्रदर्शन किया जिसका परिणाम है अटल जी का सरकार बनना और उसके बाद कांग्रेसका अति भ्रष्टाचारी रूप सामने आना और बहुमत में हिंदुओं ने भारतीय जनता पार्टी को 2014 से स्वीकार कर लिया नरेंद्र मोदी जब से प्रधानमंत्री बने हैं देश के हिंदू धर्म का प्रचार तेजी से शुरू हुआ और जब 2017 में योगी आदित्यनाथ जी ने प्रदेश का मुख्यमंत्री पद संभाला उसके बाद से तो उन्होंने अपराधियों माफियाओं पर उस तरह से प्रहार शुरू किया जैसा रामकृष्ण ने राक्षसों का वध हजारों वर्ष पूर्व किया था योगी जी ने प्रदेश को 3 वर्षों में अपराधी मुक्त कर दिया जैसा रामकृष्ण में किया था राक्षसों का सफाया करके धर्मराज की स्थापना की और जनता को निडर होकर जीने का भरोसा दिलाया अब आप सोचें यह सब धर्म कहां से आ गया यह सब धर्म और ज्ञान मुझे दूरदर्शन से मिला उनके धारावाहिकों से मिला 22 मार्च 2020 और 24 मार्च 2020 को करुणा महामारी के लॉक डाउन के शुरू होने से अब तक मैंने कोई धार्मिक धारावाहिक या किताब ऐसी नहीं है जो पड़ी ना हो और उसका ज्ञान प्राप्त ना किया हो अब आप सोचें कि 70 सालों की सरकार क्या कर रही थी उसी में तो हम भी थे और हम जनता थी इसी कारण आज जनता भारतीय जनता पार्टी को लगातार वोट दे रही है हम भी दे रहे हैं लेकिन यह स्वप्न में विश्वास नहीं होता कि जब 70 वर्षों में हमारे धार्मिक कार्यक्रमों को इस तरह नहीं दिखाया गया जैसा कि लॉकडाउन में दिखाया गया और अगर पहले से हमारी सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक विरासत को जगाए रखा गया होता तो शायद हिंदू इतना पीछे ना होता बहुमत मैं होने के बावजूद वह पीछे  होता रहा यह सब कारनामा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कि 70 सालों की मेहनत का परिणाम है कि आज नरेंद्र मोदी जी की बहुमत की सरकार दिल्ली में कायम है और प्रदेश में योगी जी की देश भी सुधर रहा है तेजी से और प्रदेश भी सुधर रहा है हम जैसों की 70 साल की उम्र में रामकृष्ण को समझ पा रहे हैं हम लोगों को तो विदेशी माओ और लेनिन के बारे में कांग्रेसियों ने ज्यादा समझायारामकृष्ण को समझने नहीं दिया कि हमारे भगवान के सामने यह हिंसक कम्युनिस्ट राक्षसों के समान थे बस यहीं पर हम जैसे लोग धर्म से भागते रहे ओ इन राक्षसों के मायावी रूप को ना पहचान सके लेकिन चलिए जो होता है अच्छा होता है देर आए दुरुस्त आए समय पर राम मंदिर बनने लगा और मोदी योगी जी को इसका स्वर्णिम अवसर मिला देश निश्चित तौर पर अब तरक्की करेगा विपक्षी चाहे जितना परेशान हो पाकिस्तान चीन भारत के खिलाफ चाहे जितने षड्यंत्र कर ले वे सफल नहीं होंगे देश और प्रदेश की जनता ने अगले 50 साल के लिए अपना दल चुन लिया देश का शासन सख्त है प्रदेश का शासन सख्त है अब इन आतंकवादियों और देश के भीतर बैठे देश विरोधियों को अपनी हरकतें छोड देनी पड़ेगी या तो वह पूरी तरह परास्त होंगे देश आगे बढ़ रहा है और बढ़ेगा अब बात में फिर ऊपर की करने जा रहा हूं करो ना महामारी के डर से हुआ लाल डाउन हमारे लिए तो वरदान साबित हो गया समय भी ठीक कट गया घर के भीतर और अपने धर्म के बारे में भीतर तक जान गया जहां इस जिंदगी में 70 साल तक नहीं पहुंच पाया था तो आप सोचें किस लॉकडाउन में भी जब हमारे जैसे अधर्मी यों का भला हो गया तो न जाने कितने करोड़ करोड़ लोगों का भला इस करो ना महामारी के लॉकडाउन ने कर दिया हमारे जीवन का तो अंत भला हो गया कहां गया है अंत भला तो सब भला वरना मंदिर बनवाने का महत्व भी ना समझ पाता क्रमश